उपेन्द्र कुशवाहा वर्तमान में काराकाट से हीं सांसद हैं और केंद्र में मंत्री भी रह चुके हैं.2014 में NDA का हिस्सा थे,मगर 2019 में महागठबंधन का हिस्सा हैं.इसबार वह अपने पार्टी के रणनीति के तहत दो जगह से चुनाव लड़ रहे हैं। एक उजियारपुर और दूसरा काराकाट।उजियारपुर में 29 अप्रैल को मतदान हो गया और काराकाट में 19 मई को होना है।माहौल को देखते हुए,यह अंदाजा लगाना मुश्किल नही कि काराकाट में उपेन्द्र कुशवाहा का पलड़ा भारी है।साफ छवि और सामाजिक समीकरण कुशवाहा की जीत को सुनिश्चित करता दिख रहा है.काराकाट के जातिय समीकरण की बात करें तो यह क्षेत्र कुशवाहा और यादव बहुल है।यादव राजद के जानाधार माने जाते हैं तो कुशवाहों के लिए खुद उपेन्द्र कुशवाहा हैं।महागठबंधन मे कांग्रेस,हम और सन आॅफ मल्लाह मुकेश साहनी के होने से कुशवाहा को और मजबूती दे रहा है।यहां से NDA का उम्मीदवार भी कुशवाहा समाज से हीं है।मगर उपेन्द्र कुशवाहा के सामने उनका कद बहुत छोटा दिख रहा है।2014 में इस जदयू उम्मीदवार ने तीसरा स्थान प्राप्त किया था।करीब 4 साल केन्द्र में मंत्री रहे उपेन्द्र कुशवाहा के मंत्रालय से कहीं कोई शिकायत सुनने को नही मिला।उपेन्द्र कुशवाहा ने अपने पार्टी रालोसपा के जरिए शिक्षा सुधार और काॅलेजियम जैसे गंभीर मुद्दे पिछले कई सालों से काफी मजबूती से उठाते आ रहे हैं।जो जनता को काफी पसंद भी आ रहा है।यह दो मुद्दे ऐसे हैं जिसे पूरे भारत में सिर्फ उपेन्द्र कुशवाहा ने हीं उठाए हैं।पटना की सड़कों पर इन्हीं मुद्दों के लिए लाठीचार्ज का भी शिकार हुए।मगर उपेन्द्र कुशवाहा का कहना है-मुझे गिराने का प्रयास हुआ है और आगे भी होगा।मगर मैं उठूंगा और हर बार लड़ूंगा और तबतक लड़ता रहूंगा।जबतक व्यवस्था में परिवर्तन नही हो जाता।

उपेन्द्र कुशवाहा की साफ छवि,मजबूत सामाजिक समीकरण,पार्टी के मुद्दे और पार्टी कार्यकर्ताओं के नया जोश कुशवाहा के ऐतिहासिक जीत की तरफ हीं इशारा कर रहा है

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