12 मई को छठे चरण का चुनाव संपन्न हुआ। बिहार के 8 सीट सहित देश के कुल 59 सीटों पर मतदान हुआ

बिहार में किस सीट पर किसका पलड़ा भारी रहा?

ये तो पूर्ण रूप से नतीजो के दिन हीं पता चल पाएगा।मगर फिलहाल बिहार की रूख को देखते हुए,यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि महागठबंधन का प्रभाव अधिक है.
वजह महागठबंधन का मजबूत सामाजिक समीकरण.ऐसे हीं समीकरण के दमपर महागठबंधन ने 2015 में बंपर जीत हासिल की थी.मगर तब महागठबंधन में नीतीश कुमार भी थे.ढाई साल बाद हीं नीतिश कुमार के हटने के बाद महागठबंधन सूना सूना सा दिखने लगा था.
मगर जिस तरह पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा पिछले साल दिसंबर में NDA को छोड़ महागठबंधन में शामिल हुई.महागठबंधन का रौनक अपने रूप में लौटता दिख रहा है.
रालोसपा के कार्यकर्ता नये जोश के साथ हैं और पिछले 3-4 सालों में रालोसपा ने जो शिक्षा सुधार और काॅलेजियम जैसे मुद्दे उठाकर अपना जनाधार बढाई है,काबिल-ए-तारीफ है.ये दो मुद्दे ऐसे हैं जिसपर बोलने से हर बड़ी पार्टी बचती रही है.
फिलहाल छठे चरण में रालोसपा की 2 सीटों पर मतदान संपन्न हुआ-पश्चिम चंपारण(बेतिया)और पूर्वी चंपारण (मोतीहारी).पश्चिम चंपारण से डा.बृजेश कुमार कुशवाहा तो पूर्वी चंपारण से आकाश कुमार रालोसपा से उम्मीदवार हैं.
दोनों हीं इस संसदीय क्षेत्र के लिए नये चेहरे हैं,नये वादे हैं,नया जोश भी है और मजबूत सामाजिक गठजोड़ दोनों हीं सीट रालोसपा के खाते में जाते दिखा रही है.इन 2 सीटों के अलावा बाकी के 6 सीट पर भी महागठबंधन कांटे की टक्कर दे रही है.NDA के लिए चुनौती कम नही दिख रही है.

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