रालोसपा सुप्रीमो उपेन्द्र कुशवाहा ने नियोजित शिक्षकों की मांगो को भी शिक्षा सुधार से जुड़ी अपने 25 सूत्री मांग के 7वीं मांग के रूप में शामिल किया था.

यह मांग उन्होंने बिहार की NDA सरकार और केंद्र की सरकार दोनों से NDA छोड़ने से पहले,दिसंबर में किया था.उन्होनें शर्त रखा था-यदि सरकार हमारी यह 25 सूत्री मांग मान ले तो वे NDA में बिना सीट शेयरिंग के बने रहेंगे.मगर सरकार के तरफ से कोई जवाब नहीं आया और 6 दिसंबर को मंत्री पद से इस्तीफा देते हुए NDA से अलग हो गये।

फिर 2 फरवरी 2019 को कुशवाहा ने इसी 25 सूत्री मांग को लेकर पटना में अपने हजारों पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ शिक्षा सुधार आक्रोश मार्च निकाला.

इस मार्च के दौरान कुशवाहा राजभवन पहुंचकर,महामहिम राज्यपाल से मिलकर अपना ज्ञापन सौंपने वाले थे.मगर रास्ते में हीं सभी प्रदर्शनकारियों सहित कुशवाहा को डाकबंगला चौराहे पर पुलिस ने रोक लिया तथा आगे जाने से मना कर दिया गया.

जब प्रदर्शनकारी नही माने तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया.इसमें अनेक कार्यकर्ता घायल हुए। स्वयं उपेन्द्र कुशवाहा भी घायल हुए तथा अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।बाद में उन्होंने आरोप लगाया-बिहार सरकार प्रशासन का इस्तेमाल करके मुझे मारने की साजिश रची थी.यदि लाठीचार्ज के दौरान कार्यकर्ताओं ने मुझे कवर नही किया होता तो मेरा बचना मुश्किल था.सरकार नहीं चाहती कि  शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो.इसलिए आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here