पूर्व नौकरशाहों ने सीएजी को खत लिखकर चिंता जताई है की नोटबंदी और रफाल पर ऑडिट रिपोर्ट देने में जानबूझकर देरी की जा रही है।

पूर्व नौकरशाहों ने अपने पत्र में यह मांग भी की है कि इन दोनों मुद्दों पर ऑडिट रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाए गौरतलब है कि सरकार पहले ही रफाल और नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्ष और मीडिया की ओर से दबाव का सामना कर रही है कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने हर भाषण में इन मुद्दों पर सरकार को घेरने का कोई कसर नहीं छोड़ा है

नोट बंदी पर मीडिया में आई रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए पूर्व नौकरशाहों ने लिखा है कि उस वक्त के सीएजी शशिकांत शर्मा ने ऑडिट रिपोर्ट में नोटों की छपाई आरबीआई के डिविडेंड और बैंकों की ओर से जुटाया गया तमाम डाटा शामिल करने को कहा था शशिकांत 2013 से 2017 तक देश की सीएजी थे उन्होंने यह भी कहा था कि नोटबंदी के बाद संभावित टैक्स चोरों को पहचानने के लिए आयकर विभाग की गई कार्रवाई को भी उसमें शामिल किया जाए।

चिट्ठी में कहा गया है पूर्व से ही के बयान को 20 महीने ज्यादा हो चुके हैं लेकिन अब तक नोट बंदी का ऑडिट रिपोर्ट का अता पता नहीं है चिट्ठी में दावा किया गया है कि राफेल डील का ऑडिट सितंबर 2018 तक कर लिया जाएगा लेकिन संबंधित फाइलों को अब तक छाटा ही नहीं गया है ।

चिट्ठी के मुताबिक ऑडिट की मौजूदा स्थिति साफ नहीं है पूर्व नौकरशाहों का कहना है कि 2G ,कोयला ,आदर्श, कामनवेल्थ खेलों की कथित घोटालों के संबंध सीएजी की रिपोर्ट ने तत्कालीन यूपीए सरकार को जनता के द्वारा प्रभावित किया था इसलिए  ऐसा लगता है कि जानबूझकर अपनी ऑडिट रिपोर्ट में देरी कर रही है ताकि इसे मई 2019 के चुनाव के बाद तक ले जा सके जिससे सरकार की गलती का चुनाव पर असर नहीं डाल सके।

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