आज पटना में लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 143 वीं जयंती के अवसर पर युवा राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के द्वारा जयंती समारोह का आयोजन किया गया।इस मौके पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री श्री उपेन्द्र कुशवाहा भी मौजूद थे।

सभा को संबोधित करते हुए कुशवाहा जी ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल हमेशा से अपने कार्यों के प्रति दृढ़ संकल्पित रहते थे,जिसके कारण उन्हें भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनियां में एक सशक्त नेता के रूप में जाना जाता है।मंत्री जी ने कहा कि पटेल जी किसानों के नेता थे और उन्हें किसानों से ही ‘सरदार’की उपाधि मिली।पटेल जी के जीवन की एक प्रेरक घटना का वर्णन करते हुए कुशवाहा जी ने कहा कि वकील के रूप में सरदार पटेल एक बार कोर्ट में अपने मुवक्किल के पक्ष में बहस कर रहे थे,तभी एक चिट्ठी के माध्यम से उन्हें अपने पत्नी के निधन का दुःखद समाचार मिला।परन्तु वे तनिक भी विचलित हुए बिना मुकदमे पर बहस करते रहे और अपने मुवक्किल को मुकदमा जितवा दिये बाद में पूछने पर पटेल जी ने कहा कि अपने कार्य के प्रति दृढ़ संकल्प के वजह से ही यह संभव हो सका।

कुशवाहा जी ने कहा कि आज से तीन वर्ष पूर्व एक ऐसा ही दृढ़ संकल्प हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने लिया था,जिसकी बदौलत सरदार पटेल की याद में आज विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’तीन वर्षों में ही बनकर तैयार हो गयी।वर्तमान युवा पीढ़ी को पटेल जी के दृढ़ संकल्प से प्रेरणा लेनी चाहिए और इस प्रतिमा का निर्माण भी इसी उद्देश्य से किया गया है।आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह सरदार पटेल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा में सभी वर्गों के ग़रीब छात्रों के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त किया ठीक उसी तरह हमलोगों को न्यायपालिका में उच्च पदों दलित, महादलित, पिछड़ा,गरीब सवर्णों आदि के छात्रों के प्रवेश के लिए दरवाजा खोलने का संकल्प लेना चाहिए।

सीट बंटवारे को लेकर मीडिया में फैले अफवाहों पर व्यंग करते हुए कुशवाहा जी ने कहा कि मीडिया के बन्धु हमारी बातों को उल्टा पुल्टा करके पेश कर देते हैं,कृपया वे ऐसा ना करें।उन्होंने आगे बताया कि अमित शाह जी ने एनडीए के सभी घटक दलों से कहा है कि जदयू के आने से सभी दलों को अपनी कुछ सीटों का त्याग करना होगा और हम इसके लिए तैयार हैं,परंतु हम अपने पार्टी समर्थकों के लिए एक सवाल का जवाब चाहते कि जब पार्टनरशिप के कारण आज हमको त्याग करने को कहा जा है तब तो उस समय जब बिहार में जदयू के साथ होने से एनडीए सत्ता में आई थी तब रालोसपा को पार्टनरशिप के तहत हिस्सेदारी क्यों नहीं मिली?

साथ ही उन्होंने कहा कि मीडिया के बंधु यह ना सोचे कि हम राज्य सरकार में हिस्सेदारी चाहते हैं बल्कि राष्ट्रीय लोक समता पार्टी तो सिर्फ यह जवाब चाहती है कि उन्हें लाभ के समय में हिस्सेदारी नहीं मिलना सही था या गलत।अगर सही था तो,उसका क्या कारण था??इस जवाब के मिलने के बाद रालोसपा त्याग करने को तैयार है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ अपने संबंधों के बारे में कुशवाहा जी ने कहा कि जितना नजदीक से वे नीतीश कुमार को जानते हैं उतना कोई नहीं जानता और जितना नज़दीक से उनको नीतीश कुमार जानते हैं उतना कोई नही जानता।उन्होंने कहा कि हमने एक बार यह कहा था कि नीतीश कुमार जी से मुलाकात के दौरान वे हमको बोले थे कि 15 साल तक मुख्यमंत्री रहने के बाद वे अब ये पद नहीं चाहते हैं और मेरे इस बात पर मीडिया में यह खबर फैलायी गयी कि उपेन्द्र कुशवाहा नीतीश कुमार से इस्तीफा मांग रहे हैं।अरे भाई नीतीश जी खुद बोले कि वह अब इस पद से सेचुरेटेड हो चुके हैं,तो उनको कोई जबर्दस्ती थोड़े ना मुख्यमंत्री बनाएगा और इसमें मेरे द्वारा इस्तीफा मांगने वाली बात कहाँ से आ गई??

साथ उन्होंने यह भी कहा कि रालोसपा एनडीए के साथ सरकार में थी,अभी भी है और आगे भी रहेगी और 2019 में अगले 5 वर्षों के लिए नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए रालोसपा कार्य कर रही है।

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