आज दिनांक 04-09-2018 को रालोसपा के जिला ईकाई के द्वारा #दलित_महादलित_अतिपिछड़ा_अधिकार सम्मेलन का आयोजन किया गया।इस सम्मेलन में,रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं  भारत के मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री माननीय श्री उपेन्द्र कुशवाहा जी भी उपस्थित थे।सम्मेलन को संबोधित करते हुए,माननीय मंत्री जी के द्वारा निम्न बातें कहीं गयीं:-
1) उन्होंने कहा कि आज के वर्त्तमान परिदृश्य में आरक्षण के अनिवार्यता को नकारा नहीं जा सकता,क्योंकि आरक्षण के द्वारा ही समाज के दलित,पिछड़े,शोषित, वंचित वर्ग के लोगों को,उच्च वर्ग के साथ लाया जा सकता है।उन्होंने ने इस बात पर भी बल दिया कि पर्तिस्पर्धा में सभी वर्गों को समान अवसर मिलने चाहिए,लेकिन इसके लिए दलित,पिछड़ों को ऊपर उठाकर उच्च वर्ग के लाइन में खड़ा करना होगा। आरक्षण की जरूरत को समझाते हुए उन्होंने एक बहुत अच्छा उदाहरण देते हुए कहा कि,अगर किसी परिवार का कोई सदस्य बीमार पड़ जाता है,तब उसे स्वस्थ होने के लिए अतिरिक्त न्यूट्रिशन की आवश्यकता होती है और तब परिवार के अन्य सदस्य अपने आहार में कमी करके उस बीमार सदस्य के आहार की पूर्ति करते हैं। चाहे एक दो-सदस्य पूरी तरह स्वस्थ क्यों ना हों,जबतक  परिवार का हरेक सदस्य  स्वस्थ नहीं हो,तबतक परिवार खुशहाल नहीं हो सकता। ठीक उसी तरह, समाज का हरेक वर्ग खुशहाल होने पर ही पूरा समाज खुशहाल हो सकता है।

मंत्री जी ने न्यायपालिका के कॉलेजियम सिस्टम में सुधार करने के मुद्दे को लेकर पार्टी द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रमों से लोगों को अवगत कराया

2)आरक्षण के मुद्दे पर ही बोलते हुए मंत्री जी ने कहा कि,कुछ युवाओं को इस बात की ग़लत जानकारी दी जा रही है कि दलित, पिछड़ों को आरक्षण देने से उनकी हकमारी हो जाएगी।उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में सबसे ज़्यादा 69%आरक्षण तमिलनाडु एवं अन्य दक्षिण के राज्यों में दिया गया है और भारत के सबसे विकसित राज्यों में इन्हीं राज्यों का नाम आता है। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि मंडल कमीशन की सिफारिशों में से सिर्फ एक-दो बातों को ही लागू किया जा सका है।उन्होंने कहा कि अभी तक ओबीसी जाति का उपवर्गीकरण पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग में सिर्फ राज्य स्तर तक ही किया जा सका है,जबकि भारत सरकार के स्तर पर सिर्फ ओबीसी के नाम से जाना जाता है और इसमें सुधार की जरूरत है।
3)अंत में ,माननीय मंत्री जी ने न्यायपालिका के कॉलेजियम सिस्टम में सुधार करने के मुद्दे को लेकर पार्टी द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रमों से लोगों को अवगत कराया और इस आंदोलन में सबको जुड़ने की अपील भी की।उन्होंने कहा कि आज देश के उच्च न्यायालय,सर्वोच्च न्यायालय के जजों की नियुक्ति,5 सदस्यीय कमिटी के द्वारा होती है और कमिटी के सदस्य अपने रिश्तेदारों को ही जज के पद पर नियुक्त कर देते हैं।इस वजह से आज न्यायालयों में दलित,पिछड़ा वर्गों का प्रतिनिधित्व ना के बराबर है।उन्होंने कहा कि जबतक न्यायालय के उच्च पदों पर दलित,पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं होगा तबतक उनके अधिकार की बातें नहीं सुनी जाएंगी।

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